2 Sept 2025

मनपसंद


ज़्यादा नहीं तो थोड़ा ही सही कुछ समय ऐसा ज़रूर निकालें जिसमें आप अपना मनपसंद कार्य करें। कई लोगों का ये अनुभव है कि जब भी कोई काम हम अपने मन के अनुरूप करतेहैं तो उस काम का परिणाम हमारी आकांक्षाओं से भी श्रेष्ठ निकाल कर सामने आता है जिससे हमारा आत्मविश्वास अपने चरम पर पहुँच जाता है और अपार आनंद की अनुभूति होती है सो अलग ।

वहीं जब हमें अपने मन के अनुरूप कार्य न मिले और मजबूरी में या दबाव में कोई कार्य करना  पड़े तो उस कार्य से शारीरिक कष्ट और मन में खिन्नता ही उत्पन्न होती है ।

मन से किया गया कठिन से कठिन से कठिन कार्य भी आत्मविश्वास और संतुष्टि प्रदान करता है जबकि ज़बरदस्ती या बेमन से किया गया सरल ,सहज कार्य भी केवल खीज और दुख उत्पन्न करता है। अतः अपनी रुचि और योग्यता को पहचान करउसके अनुरूप कार्य करें तो फिर वह कार्य, कार्य नहीं रहेगा बल्कि सुख देने वाला एक आनंददायक मनोरंजन बन जाएगा।

हेयभाव

 

मित्रों बात ये है कि हम दूसरों के प्रयासों और उनकी विशेषताओं से प्रभावित होते हैं और कहीं न कहीं हमारे मन में स्वयं के लिए हेय भाव आ जाता है। हम सोचते हैं कि काश हम भी उस जैसे होते तो उतने ही सफल होते जब हम इस तरह के विचार मन में लाते हैं तो कहीं न कहीं हम अपनी योग्यताओं को भूलकर स्वयं का अपमान करते हैं और स्वयं को कमतर आँकने लगते हैं जिससे हमारा मन और बुद्धि की योग्यता पर अनुचित प्रभाव पड़ता है ।

किसी की उपलब्धियों को देखकर प्रसन्न होना चाहिए और उसने सफलता कैसे पाई ये सीखना चाहिए लेकिन उसके जैसे ही बनने का हठ नहीं करना चाहिए। क्योंकि हर व्यक्ति की अपनी योग्यता संस्कार और प्रयास होते हैं जिनके आधार पर वो अपना जीवन चलाता है ।

एक ही माता के उदर से जन्म लेने वाले बच्चों के आचार-विचार कर्म सब अलग होते हैं कोई डॉ बनता है तो कोई क्लर्क इसलिए स्वयं को जानिए और अपने प्रति कमतरी का भाव छोड़कर स्वयं का सम्मान कीजिये फिर देखिये आपकी योग्यताएँ किस प्रकार आपका जीवन महकाती हैं और आपके जीवन से संतोष की सुगंध किस प्रकार आती है ।

पतंगे

  ‘ ज़िंदगी क्या है खुद ही समझ जाओगे , बारिशों में पतंगे उड़ाया करो। ’ ये शेर आज की परिस्थितियों में बिलकुल माकूल बैठता है ये ज़िंदगी हमें ख...